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पेंशन नियमों में बदलाव पर पूर्व कर्मचारियों ने PM को खुला पत्र लिख जताई चिंता, पहले से है ऐक्ट फिर ऐसे संशोधन की जरूरत क्यों?

विदेश नीति और सुरक्षा फर्मों में सबसे सम्मानित कुछ हस्तियों सहित 100 से अधिक सेवानिवृत्त सिविल सेवकों के एक समूह ने शनिवार को पेंशन नियमों में बदलाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा है कि इस संशोधन से वे हैरान व परेशान हैं।

पेंशन नियमों में बदलाव पर चिंता जताते हुए 109 पूर्व लोक सेवकों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और कहा कि वे अंचभित होने के साथ ही काफी निराश हैं क्योंकि हालिया संशोधन ”चुप कराने का प्रयास प्रतीत होते हैं।” संशोधित नियम के तहत, चुनिंदा खुफिया या सुरक्षा से संबंधित संगठनों में तैनात रहे सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि यदि वे कुछ प्रकाशित करना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें संगठन के प्रमुख से मंजूरी लेना अनिवार्य है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पूर्व लोक सेवकों ने कहा कि सेवानिवृत्त नौकरशाहों द्वारा अपनी तैनाती के दौरान उनके द्वारा किए गए कार्यों के विभिन्न पहलुओं पर अपने संस्मरण या लेख लिखने अथवा अपने ‘कार्यक्षेत्र’ संबंधी ज्ञान का उपयोग करके समसामयिक मामलों पर टिप्पणी करने की प्रथा सार्वभौमिक है और पूरी दुनिया में इसकी प्रशंसा की जाती है।

पत्र में कहा गया, ” कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा 31 मई 2021 को अधिसूचित केंद्रीय पेंशन नियमों में हालिया संशोधन से हम हैरान और निराश हैं। हमें यह समझ में नहीं आ रहा है कि इसमें बदलाव की क्या जरूरत थी, जब पहले से आफिशियल सिक्रेट एक्ट 1923 लागू है। इसके आधार पर भी सरकार पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।’